যজুর্বেদ ১৮/১৪ - ধর্ম্মতত্ত্ব

ধর্ম্মতত্ত্ব

ধর্ম বিষয়ে জ্ঞান, ধর্ম গ্রন্থ কি , হিন্দু মুসলমান সম্প্রদায়, ইসলাম খ্রীষ্ট মত বিষয়ে তত্ত্ব ও সনাতন ধর্ম নিয়ে আলোচনা

धर्म मानव मात्र का एक है, मानवों के धर्म अलग अलग नहीं होते-Theology

সাম্প্রতিক প্রবন্ধ

Post Top Ad

স্বাগতম

12 August, 2022

যজুর্বেদ ১৮/১৪

 

অগ্নিশ্চ মऽআপশ্চ মে বীরুধশ্চ মऽওষধয়শ্চ ऽ কৃষ্টপচ্যাশ্চ মেऽকৃষ্টপচ্যাশ্চ মে গ্রাম্যাশ্চ মে পশবऽ আরণ্যাশ্চ মে বিত্তশ্চ মে বিত্তিশ্চ মে ভূতঞ্চ মে ভূতিশ্চ মে যজ্ঞেন কল্পন্তাম্ ।।

যজুর্বেদ ১৮/১৪


पदार्थ -
(मे) मेरा (अग्निः) अग्नि (च) और बिजुली आदि (मे) मेरे (आपः) जल (च) और जल में होने वाले रत्न मोती आदि (मे) मेरे (वीरुधः) लता गुच्छा (च) और शाक आदि (मे) मेरी (ओषधयः) सोमलता आदि ओषधि (च) और फल-पुष्पादि (मे) मेरे (कृष्टपच्याः) खेतों में पकते हुए अन्न आदि (च) और उत्तम अन्न (मे) मेरे (अकृष्टपच्याः) जो जङ्गल में पकते हैं, वे अन्न (च) और जो पर्वत आदि स्थानों में पकने योग्य हैं, वे अन्न (मे) मेरे (ग्राम्याः) गांव मे हुए गौ आदि (च) और नगर में ठहरे हुए तथा (मे) मेरे (आरण्याः) वन में होने हारे मृग आदि (च) और सिंह आदि (पशवः) पशु (मे) मेरा (वित्तम्) पाया हुआ पदार्थ (च) और सब धन (मे) मेरी (वित्तिः) प्राप्ति (च) और पाने योग्य (मे) मेरा (भूतम्) रूप (च) और नाना प्रकार का पदार्थ तथा (मे) मेरा (भूतिः) ऐश्वर्य (च) और उस का साधन ये सब पदार्थ (यज्ञेन) मेल करने योग्य शिल्प विद्या से (कल्पन्ताम्) समर्थ हों॥

भावार्थ - जो मनुष्य अग्नि आदि की विद्या से सङ्गति करने योग्य शिल्पविद्या रूप यज्ञ को सिद्ध करते हैं, वे ऐश्वर्य को प्राप्त होते हैं॥

No comments:

Post a Comment

ধন্যবাদ

বৈশিষ্ট্যযুক্ত পোস্ট

রামায়ণ সন্দর্শিকা

সমগ্র বিশ্বে নিম্নলিখিত ৩টি গ্রন্থ সর্বাধিক শ্রেষ্ঠ— (১) বেদ (২) রামায়ণ (৩) মহাভারত। এই তিনটি গ্রন্থের প্রভাব কেবল ভারতবর্ষেই নয়, বরং সমগ্...

Post Top Ad

ধন্যবাদ