ঋগ্বেদ ১০/৪৮/৭ - ধর্ম্মতত্ত্ব

ধর্ম্মতত্ত্ব

ধর্ম বিষয়ে জ্ঞান, ধর্ম গ্রন্থ কি , হিন্দু মুসলমান সম্প্রদায়, ইসলাম খ্রীষ্ট মত বিষয়ে তত্ত্ব ও সনাতন ধর্ম নিয়ে আলোচনা

धर्म मानव मात्र का एक है, मानवों के धर्म अलग अलग नहीं होते-Theology

সাম্প্রতিক প্রবন্ধ

Post Top Ad

স্বাগতম

08 July, 2021

ঋগ্বেদ ১০/৪৮/৭

অভী३॒॑দমেকমেকো অস্মি নিষ্ষাळভী দ্বা কিমু ত্রয়ঃ করন্তি।

খলে ন পর্ষান্প্রতি হন্মি ভূরি কিম্ মা নিন্দন্তি শত্রবোऽনিন্দ্রাঃ।। (ঋঃ ১০|৪৮|৭)

अ॒भी॒३॒॑दमेक॒मेको॑ अस्मि नि॒ष्षाळ॒भी द्वा किमु॒ त्रय॑: करन्ति ।
खले॒ न प॒र्षान्प्रति॑ हन्मि॒ भूरि॒ किं मा॑ निन्दन्ति॒ शत्र॑वोऽनि॒न्द्राः ॥
पदार्थ -
(एकः-निष्षाट्-इदम्-अस्मि) यद्यपि मैं अभिभूत करनेवाला परमात्मा अकेला हूँ, तथापि (एकम्-अभि) एक निन्दक या नास्तिक वर्ग को भी अभिभूत करता हूँ-अपने अधीन करके दण्ड देता हूँ (द्वा-अभि) दो वर्गों को भी दण्ड दे देता हूँ यद्वा (त्रयः किम्-उ करन्ति) अथवा तीन नास्तिक वर्ग भी क्या कर सकते हैं-क्या करेंगे ? उनको भी मैं अभिभूत करता हूँ, दण्ड देता हूँ (खले न पर्षान् भूरि प्रतिहन्मि) जैसे संग्राम में उसके भर देनेवाले योद्धाओं को हनन किया जाता है, ऐसे नास्तिकों-निन्दकों का हनन करता हूँ अथवा खलिहान में जैसे गाहे जाते हुए पूलों का विदारण किया जाता है, ऐसे विदारण करता हूँ (अनिन्द्राः शत्रवः किं मा निन्दन्ति) वे जो मुझ इन्द्र को-ऐश्वर्यवाले परमात्मा को जो नहीं जानते और मानते, ऐसे नास्तिक-शत्रु-विरोधी मेरी क्यों निन्दा करते हैं, अतः वे दण्डभागी होंगे ॥

भावार्थ - परमात्मा एक है, परन्तु वह अकेला भी अनेक या बहुतेरे निन्दकों नास्तिकों-पापियों के वर्गों को दण्ड दे सकता है, जैसे संग्रामस्थल में सैनिक हताहत कर दिये जाते हैं या जैसे खलिहान में अन्नपूलों को चूर-चूर कर दिया जाता है, ऐसे ही परमात्मा उन वर्गों को चूर-चूर देता है। वे निन्दक या नास्तिक परमात्मा का कुछ नहीं बिगाड़ सकते हैं ॥-स्वामी ब्रह्ममुनि परिव्राजक

অর্থাৎ - আমি যদিও একা তবুও এক, দুই, তিন শত্রুও আমার কিছুই করতে পারবে না। আমি শত্রুদের এমনভাবে পিষে ফেলবো যেভাবে খলিহানে অন্ন পিষা হয়, কারণ যার কোনো মার্গদর্শক সেনাপতিই নেই, সে শত্রু আমরা কি নিন্দা করতে পারে!

No comments:

Post a Comment

ধন্যবাদ

বৈশিষ্ট্যযুক্ত পোস্ট

রামায়ণ ও মহাভারতের সময় নির্ধারণ

  রামায়ণ ও মহাভারতের সময় নির্ধারণ | নিলেশ নীলকণ্ঠ ওক মহাভারতের সময় নির্ধারণের জন্য ১৩০-এরও বেশি প্রচেষ্টা এবং রামায়ণের সময় নির্ধারণের জ...

Post Top Ad

ধন্যবাদ